शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2009

कौन किसे गाली देरहा है, यह जनता तय करे तो बेहतर !

Blogger sanjaygrover said...ये पाँच लाइन भी लिखने की क्या ज़रुरत भी ? कोई एक पुराना श्लोक ढूंढकर चेप देते। चूंकि वह एक महान ग्रन्थ में से निकला होता, इसलिए उसमें कोई तर्क होता न होता पर उसकी तार्किकता सवयंसिद्ध होती। वैसे तो गालियों की भाषा आपने ही शुरु की है पर आपकी गाली का भी स्वागत करुंगा बशर्ते कि तर्कपूर्ण हो। तर्कहीन बोगस श्लोकों का ज़माना चला गया। ‘‘दुनिया खराब है’’ की वजुहात को सकारण और सतर्क अपने लेखादि में उठाया जाना आपको अराजकता लगती है और पब में लड़कियों को पीटना और ऐसे लोगों को जंगल में भेज देने के आदेश जारी करना ‘‘सामाजिकता’’। तो फिर आप ही बताईए आपका किया क्या जाए ?

February 13, 2009 11:35 AM

Blogger Sushant Singhal said...

सही कहा आपने ! पांच लाइन लिखना भी व्यर्थ ही रहा। आप स्वयं से ही नाराज़ हैं, ख़फा हैं और मैं नासमझ यह सोच - सोच कर दुःखी हो रहा था कि आप मुझसे नाराज़ हो गये हैं !

आपको आपके अभियान के लिये हार्दिक शुभेच्छायें। आपका अभियान क्या है, यह तो मैं समझ नहीं पाया, पर जो भी है - समाज हित की उदात्त भावना से ही होगा ! 

इस अंतहीन बहस को मैं अपनी ओर से यहीं समाप्त मान रहा हूं। बौद्धिक विचार-विमर्श में कड़वाहट के लिये कोई स्थान नहीं होना चाहिये! यदि आपको संस्कृत जैसी भाषा से भी इतनी भयंकर एलर्जी है तो फिर कुछ कहने को बाकी ही नहीं रह जाता ! 

सादर नमस्कार

सुशान्त सिंहल

1 टिप्पणी:

  1. कोशिश करें कि इस मुद्दे को यहीं पर दफना दें!! और आगे बढ़ें !!

    सकारात्मक रह कर अपनी रचनात्मक उर्जा का प्रसार करने कि कोशिश आप दोनों लोग करें !!! ........यही हिन्दी ब्लॉग जगत के लिए अति आवश्यक होगा

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आपके विचार जानकर ही कुछ और लिख पाता हूं। अतः लिखिये जो भी लिखना चाहते हैं।