शनिवार, 2 अक्तूबर 2010

सेकुलरिस्ट पार्टियों को अयोध्या फैसला अपने लिये हानिकर प्रतीत हो रहा है।

अब जबकि अयोध्या फैसले को लेकर देश के हर कोने से सन्तोष, प्रसन्नता और सद्भाव की भावनायें व्यक्त की जा रही हैं,  मुम्बई के मुसलमान राम मन्दिर निर्माण के लिये ईंटें देने का प्रस्ताव रख रहे हैं, हर ओर न्यायपालिका की वाह-वाही हो रही है,  कुछ घटिया राजनीतिबाज एक दिन फैसले से सुन्न रह जाने के बाद अब पुनः देश को आग में झोंकने का प्रयास करते दीख रहे हैं। उन्हें यह अफसोस है कि देश के मुस्लिम समुदाय ने इस फैसले को शान्ति व सन्तोष के साथ स्वीकार क्यों कर लिया है, प्रसन्नता क्यों व्यक्त की है।

इन घटिया राजनीतिबाजों की लिस्ट में सबसे पहला नाम मुलायम सिंह यादव का आता है। ये महाशय फरमा रहे हैं कि "न्यायपालिका के इस फैसले से देश के मुसलमान स्वयं को ठगा हुआ अनुभव कर रहे हैं।"  वास्तव में वह चाहते हैं कि देश के मुस्लिमों को इस फैसले को अस्वीकार कर देना चाहिये ।  यह वही मुलायम सिंह हैं जिन्होने आडवाणी की राम रथ यात्रा के दौरान, रथयात्रा के जवाब में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में तथाकथित ’सद्‌भावना यात्रायें’ आयोजित की थीं और जिस-जिस जिले में भी गये थे,  वहीं दो दिनों के अन्दर अन्दर साम्प्रदायिक दंगे भड़कते चले गये थे।  देश के तथाकथित सेकुलरिस्टों ने इन सभी दंगों के लिये राम रथयात्रा को दोषी ठहराया था जबकि इन दंगों के सूत्रधार मुलायम सिंह यादव खुद थे।  राम रथयात्रा तो उत्तर प्रदेश तक पहुंच ही नहीं पाई थी और जहां - जहां से राम रथयात्रा निकली थी, वहां साम्प्रदायिक दंगे नहीं हुए थे।  दंगे हुए भी थे तो उत्तर प्रदेश के उन जिलों में जहां मुलायम सिंह यादव ने अपने वक्तव्यों से रामजन्म भूमि आन्दोलन के विरुद्ध जहर उगला था।

सूची में अगला नाम आता है पी. चिदम्बरम का ।  हिन्दू और मुस्लिम नेतृत्व कह रहा है कि पुरानी कटुता को भुला कर हमें उज्ज्वल भविष्य की ओर आगे बढ़ना चाहिये और विभिन्न समुदायों के बीच परस्पर सहयोग के एक नये युग की शुरुआत होनी चाहिये ।  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत भी अत्यन्त मृदु भाषा में हिन्दू - मुस्लिम सद्‍भाव को और पुष्ट करने की जरूरत पर बल दे रहे हैं परन्तु पी. चिदम्बरम देश के मुसलमानों को बाबरी मस्जिद के ढहाये जाने की याद दिला-दिला कर प्रयास कर रहे हैं कि मुस्लिम और हिन्दू समुदाय के बीच में जो समझदारी पूर्ण समरसता का मार्ग खुल रहा है, वह फिर से बन्द हो जाये ।  वास्तव में पी चिदम्बरम एक राष्ट्रीय शर्म हैं।  जब वह कहते हैं कि यह सब झूठ है कि भारत कभी सोने की चिड़िया था, यहां घी - दूध की नदियां बहती थीं,  ज्ञान - विज्ञान का बोलबाला था,  भारत विश्वगुरु कहलाता था तो वह यही सिद्ध करते हैं कि मैकाले ने भारतीयों के लिये जिस प्रकार की शिक्षा का प्रबन्ध किया था, वह उस शिक्षा का सबसे घटिया उत्पाद और राष्ट्रीय शर्म बन कर देश के सम्मुख उपस्थित हैं और हर दृष्टि से एक काले अंग्रेज़ हैं।   ऊपर से करेला और नीम चढ़ा ये कि वे कांग्रेसी भी हैं और यह यह सोच-सोच कर परेशान हैं कि कहीं इस अयोध्या फैसले का लाभ भाजपा न ले जाये ।  इसलिये वह मुस्लिम समुदाय को भड़का रहे हैं कि कहीं संघ और भाजपा के साथ प्रेम की पींगें न बढ़ाने लग जाना क्योंकि ये वही लोग हैं जिन्होंने तुम्हारी बाबरी मस्जिद को ढहाया था। वास्तव में कांग्रेसियों ने अंग्रेज़ों से सबसे पहला सबक जो सीखा था वह यही है - "फूट डालो और राज करो।"   यदि भाजपा और संघ मिल कर हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के बीच में विश्वास का माहौल बनाना भी चाहें तो कांग्रेस को अपनी गद्दी डगमगा रही लगने लगती है। वह यह कभी भी स्वीकार नहीं कर सकती कि हिन्दू और मुस्लिमों के बीच में सद्‌भाव बने क्योंकि यदि ऐसा होगा तो संघ और भाजपा को खलनायक के रूप में कैसे चित्रित करेंगे?  

जब तक देश में इस प्रकार की घटिया वोटपरक राजनीति चलती रहेगी, हिन्दू और मुसलमानों के बीच अविश्वास की खाई भी खोदी जाती रहेगी ।  होना यह चाहिये था कि अदालत के इस फैसले के बाद अयोध्या में रामजन्मभूमि स्थल पर एक भव्य मंदिर और फैज़ाबाद में एक शानदार मस्जिद बनाने का एजेंडा सामने रख कर आगे बढ़ा जाता,  पर देश के सेकुलरिस्टों को यह चिन्ता खाये जा रही है कि यदि हिन्दू और मुस्लिम एक हो गये तो उनकी सेकुलर वाद की राजनीति की दुकान बन्द हो जायेगी ।   क्या हमारे नेता वास्तव में लोकतंत्र का अर्थ समझ पाये हैं?    

2 टिप्‍पणियां:

  1. सही कह रहे है आप , अदालत के इस फैसले से छद्म सेकुलरों के अरमान धुल धूसरित हो गए वे सोचते ही रही गए कि आखिर दंगे क्यों न हुए | उन्ही दंगों के पीछे उनकी राजनीती जो चलती है |

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  2. aji inhi ne to desh ko loota hai or tarakki ko badhit kiya hai. vese ab vikas ki subah hone wali hai

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