मंगलवार, 3 मार्च 2009

फोटोग्राफी क्लासरूम - लेंस एपर्चर को जानिये




किसी अंधेरे बंद कमरे में यदि प्रकाश के लिये केवल एक खिड़की हो तो हम समझ ही सकते हैं कि खिड़की जितनी बड़ी होगी, कमरे में उतना ही अधिक प्रकाश होगा - विशेषकर खिड़की के ठीक सामने पड़ने वाली दीवार पर !  कोई खिड़की सामने वाली दीवार को कितना प्रकाशित कर पायेगी यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि खिड़की और दीवार के बीच में कितनी दूरी है।    छोटे कमरे को प्रकाशित करने के लिये छोटी खिड़की पर्याप्त रहेगी, कमरा बड़ा हो तो खिड़की भी बड़ी करनी पड़ेगी । ठीक है न?
 
हमारा कैमरा भी एक अन्धेरा बंद कमरा है और उसकी लेंस वह खिड़की है जिससे प्रकाश सामने वाली दीवार पर पहुंचता है।  ’सामने वाली दीवार’ यानि - फिल्म (film) (आजकल के डिजिटल कैमरों में फिल्म की जगह पर सी.सी.डी (CCD) लगा दी गई है।)
 
बहुत सस्ते कैमरों मे इस लेंस रूपी खिड़की को छोटा या बड़ा नहीं किया जा सकता है।  दुकानदार आपके कैमरे में फिल्म डाल देता है और कहता है कि धूप में फोटो अच्छी आयेंगी। कुछ बेहतर कैमरों में एक छोटा सा लीवर लगा दिया गया और कहा गया कि तेज धूप हो तो इस लीवर को सूरज के निशान पर कर देना और बादल हों तो बादल के निशान के आगे कर के फोटो खींच लेना, अच्छी फोटो आ जायेगी।  यह लीवर वास्तव में लेंस को कम या अधिक खोलने के लिये हुआ करता था। इसे लेंस का एपर्चर (aperture) बदलना कहा जाता है।  एपर्चर जितना ज्यादा खुला हुआ हो, उतना ही अधिक प्रकाश फिल्म पर पहुंचेगा।  यह एपर्चर हमारी आंख में भी होता है  जिसे  iris  कहते हैं।  कम प्रकाश में हमारी आंख का iris अधिक खुल जाता है और धूप में यह न्यूनतम खुलता है। यह आटोमैटिक एपर्चर है जो विधाता ने हमें दिया है।  
 
लोगों की इच्छायें बढ़ती गयीं तो लेंस के एपर्चर में इतने परिवर्तन की व्यवस्था हो गयी कि सूर्य के प्रकाश से लेकर मोमबत्ती तक के प्रकाश में फोटो खींचना संभव हो गया।
 
 सूर्य के प्रकाश में फोटो खींचनी हो तो एपर्चर बिल्कुल कम कर दो और यदि मोमबत्ती के प्रकाश में चित्र चाहिये तो एपर्चर पूरा खोल दो! आपके कैमरे की लेंस पर यदि 1.4, 2, 2.8, 4, 5.6, 8, 11, 16, 22, 32  आदि आदि अंक लिखे हुए हैं तो ये एपर्चर की विभिन्न सेटिंग्स हैं। पर आपकी उम्मीद के सर्वथा विपरीत, 1.4 अधिकतम एपर्चर है और 32 न्यूनतम एपर्चर है अर्थात मामला उलटा है।  ऐसा क्यों है, इस गहराई में जाकर मामले को बोझिल बनाना यहां आवश्यक नहीं है।  यदि आपका कैमरा डिजिटल है तो आपकी लेंस पर ऐसी कोई सेटिंग्स नहीं दिखाई देंगी परन्तु आपके एल.सी.डी (LCD)  स्क्रीन पर ये नम्बर दिखाई दे सकते हैं ।  यदि आपके डिजिटल कैमरे में एपर्चर बदलने की स्वतंत्रता दी गयी है तो ये सैटिंग्स अवश्य मिलेंगी। 

 
 
यह कतई आवश्यक नहीं है कि हर लेंस पर 1.4 से लेकर 32 तक सारे के सारे एफ स्टॉप f stops उपलब्ध हों ।  अरे हां, इन संख्याओं को एफ स्टॉप ( f stops ) कहा जाता है।     हो सकता है कि आपकी लेंस पर ये एफ स्टॉप 2.8 या 4 या 5.6 से आरंभ हों तथा 22  या 32 तक न जाकर 16 या 11 पर ही समाप्त हो जायें।  जो कैमरे बहुत सस्ते हुआ करते थे उनकी लेंस पर तो केवल दो एफ स्टॉप थे - 8 और 11 ।  8 का प्रयोग बादल के लिये कर लो और 11 का उपयोग तेज़ धूप के लिये !  8 लिखने के स्थान पर बादल का चित्र बना होता था और 11 के स्थान पर सूर्य का चित्र बना दिया जाता था।  पर ये गये जमाने की बात है।  अब हम बहुत सौभाग्यवान हैं कि हमें बहुत उचित मूल्य पर ऐसे कैमरे उपलब्ध हैं जिनको देख कर ही पुराने जमाने को फोटोग्राफर का तो खुशी के मारे हार्टफेल ही हो जाता।    
 
यदि आप कम प्रकाश में फोटोग्राफी करना चाहते हैं तो लेंस एपर्चर lens aperture को यथा संभव खोलने से

 फिल्म या सीसीडी तक पहुंचने वाला प्रकाश बढ़ जायेगा व आप कम प्रकाश में भी फोटो खींच पायेंगे।
 
आजकल के लगभग सभी कैमरों में एक्सपोज़र मीटर (exposure meter) लगा दिये गये हैं जो प्रकाश की मात्रा के अनुसार कैमरे की लेंस का एपर्चर नियंत्रित (aperture control with the help of photo-sensitive cells)  करने लगे हैं।  जब आप फोटो ऑटो मोड auto mode पर खींचते हैं तो आपकी लेंस का एपर्चर कितना हो - यह कैमरा खुड ही तय करने लगता है।
 
कल को हम कैमरे के शटर के बारे में चर्चा करेंगे।  यदि आज कही गयी बातों में कुछ स्पष्टीकरण की आवश्यकता अनुभव हो तो आपका स्वागत है। 
 
आपका ही,
 
सुशान्त सिंहल

5 टिप्‍पणियां:

  1. हिंदी में ऐसे विषयों पर जानकारी बहुत कम जगह मिलती है. आपने बिलकुल सरल तरीके से अपर्चर को समझाया है...इस बेहतरीन प्रयास के लिए बधाई. उम्मीद है आप आगे भी ऐसे लिखते रहेंगे.

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  2. सरल व सुन्दर विवरण. धन्यवाद. जारी रखें.

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  3. बहुत ही जरूरी जानकारी, बहुत ही बेहतरीन तरीके से दी गई।

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  4. एपर्चर की सेटिंग के विषय में उम्दा जानकारी. बहुत आभार.

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