मंगलवार, 10 फ़रवरी 2009

कौन सा कैमरा खरीदें (२) Which camera should I buy? (2)

            फोटोग्राफी ( photography ) का शाब्दिक अर्थ है - प्रकाश का अंकन ( photo = light, graphy = recording )  यदि प्रकाश नहीं है तो फोटोग्राफी भी नहीं हो सकती ।  हां, कुछ वीडिओ कैमरे ( video camera ) ऐसे हैं जो पूर्ण अंधकार ( zero lux shooting ) में भी चित्र लेते हैं पर वह प्रकाश के सहारे नहीं अपितु इंफ्रारैड किरणों ( infra-red radiation ) के सहारे चित्रांकन करते हैं जिसके लिये कैमरे पर दिया गया एक स्विच ( Night Shot or Super Night Shot )  सरका कर इस सुविधा को एक्टिवेट ( activate ) करना होता है।  ये फोटोग्राफ अच्छे तो नहीं होते पर किसी रिश्वतखोर को स्टिंग ऑपरेशन (sting operation ) के द्वारा जेल भिजवाने के लिये पर्याप्त हैं।  खैर !

 

            कैमरे के दो कार्य हैं - ) किसी दृश्य को व्यू फाइंडर पर दिखाना (showing a scene on view finder)  ) उस दृश्य को, यदि हम चाहें तो स्थाई रूप से किसी न किसी मीडिया पर अंकित कर देना ( recording the scene on one or the other media )  पहले ये मीडिया फिल्म होती थी, पर धीरे धीरे डिजिटल मेमोरी कार्ड फिल्म का स्थान लेते चले जा रहे हैं ।  वीडिओ कैमरा मैग्नेटिक टेप पर यह रेकार्डिंग करता है।  नवीनतम डिजिटल वीडिओ कैमरे मैमोरी चिप, डीवीडी या हार्ड डिस्क को मीडिया के रूप में इस्तेमाल करने लगे हैं ।  

 

            कैमरा किसी दृश्य को अच्छी प्रकार से व्यू फाइंडर में दिखा पाये, यह मूलतः कैमरे की लेंस की क्वालिटी ( quality of the camera lens)  पर निर्भर करता है।  यदि एक ही कंपनी ने आज दो लेंस बनाये हैं - एक का बाहरी ग्लास का डायमीटर  १ सेमी  और दूसरे का २ इंच है तो बड़ा लेंस छोटे की तुलना में कई गुना ज्यादा बारीकी से आपके दृश्य को अंकित कर पायेगा । इसे लेंस की रिज़ॉल्विंग पॉवर ( resolving power of the lens ) कहते हैं ।  कोई भी कंपनी कितनी भी प्रतिष्ठित क्यों न हो, उसके मोबाइल फोन (mobile phone) में लगी हुई बेचारी नन्हीं सी लेंस किसी भी बड़ी लेंस का मुकाबला नहीं कर सकती । जब लेंस की अपनी सीमा आ जाये तो मेगा पिक्सल (megapixels) बढ़ाने से क्या हो जायेगावैसे मैने कुछ चित्र सोनी एरिक्सन मोबाइल फोन (Sony Erricson mobile phone )  से खींचे हुए देखे हैं जिनको देख कर सहजता से विश्वास नहीं होता कि ये मोबाइल फोन का रिज़ल्ट है।  

 

            यदि लेंस की क्वालिटी चेक करनी हो तो फोटो खींच कर उसे कम्प्यूटर के बड़े मॉनीटर पर ज़ूम करके देखिये ।  यदि पलकें, सिर के (या दाढ़ी के) बाल अलग-अलग और स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं तो लेंस की रिज़ॉल्विंग पॉवर (resolving power)  अच्छी है।  यह रिज़ॉल्विंग पॉवर जिन जिन बातों पर निर्भर करती है उनमे एक लेंस का डायमीटर भी है।  आप दुकान पर खड़े होकर और चीज़ें तो चैक नहीं कर सकते पर लेंस कितनी बड़ी है, यह तो नंगी आंखों से भी दिखाई देता है। 

 

            अतः फार्मूला नंबर १ - जब कैमरा खरीदें तो मेगा पिक्सल कितने हैं इस पर कम और लेंस कितने डायमीटर की है, इस पर अधिक ध्यान दें ।  लेंस का फ्रंट ग्लास एलिमेंट (front glass element)  का डाया ज्यादा है तो कम पिक्सल भी चलेंगे ।  (कम पिक्सल का यहां अर्थ है - minimum पांच मेगा पिक्सल)  चूंकि आम जनता मेगा पिक्सल पर जोर देने लगी है, इसलिये प्रतिस्पर्धा के चलते, कैमरा निर्माता कंपनियां ग्राहकों को अधिकाधिक इम्प्रेस करने के लिये मेगापिक्सल बढ़ाये चली जा रही हैं । ऐसा करने से बिना निर्माण खर्च बढ़ाये कैमरे का मूल्य बढ़ाया जा सकता है !

 

लेंस के बाकी आस्पेक्ट्स पर कल बात करेंगे ।  फिलहाल बंदे को अनुमति दीजिये । नमस्कार !

 

10 टिप्‍पणियां:

  1. आप के द्वारा दी जा रही जानकारी से बहुत से भ्रम के बादल छंटते जा रहे हैं।

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  2. बहुत अच्छी जानकारी! लेकिन इस तरह अपने निवास स्थान का पता देना घातक हो सकता है। अगर देना ही है तो ई-मेल में हस्ताक्षर के रूप में दें!

    बहुत ख़ूब, सुन्दर प्रस्तुति


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    गुलाबी कोंपलें | चाँद, बादल और शाम

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  3. बहुत ही सुंदर जानकारी. एकदम हमारे जैसे अनपढ़ भी समझ सकते हैं. आभार.

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  4. आपका उत्साहवर्धन मेरे लिये प्रेरक सिद्ध हो रहा है।

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  5. sir sushant i m a indian but i didn't like indians kyunk wo nahi chahte ke koi dusra bhi unchaio ko chhue mane internet se bht kuchh sikha photoshop english photography etc mujhe harani thi k indians itne gire hote ke net pe koi aisa indian nhi jo dusro ko sikhaye jo chahe koi or bhi trreki ki rah pe chle i am realy proud of you i salute you you r great apke bloges padhke bht achha lgta thank you so much sir

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  6. Thank you Raj Dhimaan for your kind words. मैने एक बार कहीं पढ़ा था कि यदि आप किसी विषय को बहुत अच्छे से समझना चाहते हैं तो उसे पढ़ाना शुरु कर दीजिये। आपकी अपनी समझ भी बेहतर होती चली जायेगी! ऐसे में यदि मैं आप सब को अपनी सीमित जानकारी के आधार पर कुछ बताता हूं तो उससे मुझे खुद को भी बहुत लाभ होता है। ज्ञान देने से बढ़ता ही है, घटता नहीं !

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आपके विचार जानकर ही कुछ और लिख पाता हूं। अतः लिखिये जो भी लिखना चाहते हैं।